क्षत्रिय व क्षात्र धर्म
'क्षत्रिय'
'क्षत्रिय' शब्द की
व्युत्पत्ति की दृष्टि से अर्थ है जो दूसरों को क्षत (विनाश) से बचाये।
"क्षति से समाज की रक्षा करता है वो है “क्षत्रिय" यथार्थ में सृष्टि को क्षय (विनाश) से त्राण कराने
वाला 'क्षत्रिय' कहलाता
है|
शास्त्र द्वारा परिभाषित व् इतिहास द्वारा
समर्थित रक्षण से तात्पर्य है विष समाज से अमृत समाज की रक्षा करना |
भगवान कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध क्षेत्र में
उपदेश देते हुए कहा था “ में साधुओ, अर्थात
सज्जन पुरुषो यानि अमृत समाज की रक्षा करने व् दुष्ट लोगो अर्थात विष समाज का
विनाश करने के लिए अवतार लेता हूँ “
इसी प्रकार के क्षत्रियोचित कार्यो के लिए “भगवान नारायण” ने अपने ह्रदय
से क्षत्रिय को पैदा किया |

1 comment:
bahut he achhi jankari di aapne kshatriya ke bare me . me bhi iske upar ek page bana raha hu . jisme aapki yah post sabse pehle dunga . yadi aapki ijajat ho to.
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