Sunday, 31 March 2013

यदि महिलाये क्षात्र परम्परा का पालन करेंगी तो वह कभी भी अपने आपको विधवा होने से बचाए रखेगी. जिसमे महीलाओ व् बालिकाओ द्वारा एक महान कार्य जो वे सब पहले करती थी और आज नहीं करती है | वो है मन्त्र जाप मंत्र मन तथा त्र शब्दों से मिल कर बना है। मंत्र में मन का अर्थ है मनन करना अथवा ध्यानस्त होना तथा त्र का अर्थ है रक्षा। इस प्रकार मंत्र का अर्थ है ऐसा मनन करना जो मनन करने वाले की रक्षा कर सके। अर्थात मन्त्र के उच्चारण या मनन से मनुष्य की रक्षा होती है।  और वो मन्त्र  है महामृत्युन्जय मन्त्र का जप और वह कुछ इस तरह से है


 ॐ त्रयम्बकम यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम |
 उर्व्वारुकमिव बन्धनात म्रत्योर्मुक्षीय माम्रतात ||
ॐ त्रयम्बकम यजामहे सुगंधिम पति वेदनम |
 उर्व्वारुकमिव बन्धनात दितो मुक्षीय माम्रतात || (यजु - ३/60)

उपयुक्त मन्त्र से भी यह स्पस्ट है तथा परम्परा भी यही रही है की क्षत्रानिया हमेशा सदाशिव की ही उपासक रही है सदाशिव सारे संसार के गुरु है और क्षत्रानिया गुरु रूप में अपने पति को प्राप्त करने के लिए सदा से भगवान सदाशिव की उपासना करती है |

उपर्युक्त मंत्र कितना प्रभाव शाली है इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है की इस मंत्र के दो खंडो में से जो पहला खंड है वही महामृतुन्जय मंत्र कहलाता है| जब किसी व्यक्ति के भयानक मृत्यु का योग हो उस समय उसकी प्राण रक्षा के लिए इसके जप किये जाते है | अब आप कल्पना कीजिये की जिस परिवार की प्रत्येक स्त्री, पुत्री , माता व् बहिन आदि प्रतिदिन इस मंत्र का जप करे और जीवन पर्यन्त करे , उनके परिवार जनो से क्या कोई कर्मक्षेत्र व युद्ध क्षेत्र में लोहा लेने का साहस कर सकता है|
यही कहना है की क्षत्रियो के शोये व पराक्रम के महान इतिहास के पिछे उनकी धर्म प्राण तपस्वी पुत्रियों, पत्नियों व् माताओ का ही महान योगदान रहा है|


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